क्या तीसरे महीने में गर्भावस्था के लक्षण?HealthPlanet

Posted on Tue 7th Feb 2023 : 12:28

गर्भावस्था के तीसरे महीने के सामान्य लक्षण

गर्भावस्था के तीसरे महीने के दौरान आपके शरीर में निम्नलिखित परिवर्तन और लक्षण दिखाई देते हैं:

1. मॉर्निंग सिकनेस

गर्भावस्था के तीसरे महीने में मतली की समस्या चरम पर हो सकती है और पहली तिमाही के अंत तक अधिकांश गर्भवती महिलाओं में इसके लक्षण खत्म हो जाते हैं।

2. थकान

गर्भावस्था के हॉर्मोन में उतार-चढ़ाव के कारण आपको थकान और आलस महसूस हो सकता है। भ्रूण को आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए शरीर को अधिक रक्त की आवश्यकता होती है जिससे रक्त-शर्करा और रक्त-चाप भी प्रभावित हो सकता है।

3. मूत्राशय नियंत्रण में कमी

चूंकि शरीर गर्भावस्था के हॉर्मोन एच.सी.जी. को उत्पन्न करता है, इससे रक्त की मात्रा में वृद्धि होती है जो मूत्राशय पर दबाव डालती है। गर्भावस्था के तीसरे महीने में बढ़ता हुआ गर्भाशय भी मूत्राशय पर दबाव डालता है जिस कारण बार-बार पेशाब लगती है।

4. कब्ज़

उच्च प्रोजेस्टेरोन का स्तर पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देता है।

5. योनि स्राव

एस्ट्रोजेन का स्तर बढ़ने और गर्भाशय ग्रीवा व योनि की दीवार फैलने से योनि से श्वेत रंग के श्लेम का स्राव होता है, जो किसी भी संक्रमण को गर्भाशय में जाने से रोकता है।

6. पैरों में ऐंठन

गर्भावस्था के तीसरे महीने में अक्सर रात को पैरों में गंभीर ऐंठन और दर्द एक आम बात हो सकती है। आपको अपने आहार में पोटेशियम और लौह तत्व शामिल करने की आवश्यकता है और कुछ हल्के व्यायाम भी इस पीड़ा को कम करने में मदद कर सकते हैं।

7. पीठ दर्द और पेट दर्द

हॉर्मोन के स्तर में परिवर्तन और गर्भाशय के बढ़ने से स्नायुबंधन में खिचाव व तनाव आता है, जिसके कारण पीठ दर्द और पेट के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है। चिकित्सक से परामर्श के बाद कुछ हल्के व्यायाम और स्ट्रेचिंग करने की कोशिश करें।

8. मनोदशा परिवर्तन

हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव आपके शरीर में भावनात्मक परिवर्तन का कारण बनते हैं और आप इस दौरान दुःखी व निराश होने से अचानक प्रसन्न और आनंदित होने का अनुभव तक कर सकती हैं।

9. मसूड़ों से खून बहना

हॉर्मोन के स्तर में परिवर्तन से मसूड़ों में सूजन और रक्तस्राव भी होता है।

10. सीने में जलन

बढ़ता हुआ गर्भाशय पेट पर दबाव डालता है और आपका फैलता हुआ शरीर पाचन प्रक्रिया को धीमा कर देता है। पेट पर दबाव के कारण अम्ल ऊपर की ओर बढ़ता है, जिससे सीने में जलन होती है। नियमित समय पर थोड़ा-थोड़ा खाते रहने का प्रयास करें।

11. नसों में सूजन (वेरिकोज वेन्स)

जैसे-जैसे गर्भाशय बढ़ता है, रक्त वाहिकाएं संकुचित होती हैं और रक्त प्रवाह भी धीमा हो जाता है, यह आपके पैरों में नसों की सूजन का कारण बनता है। आपका बढ़ता वजन संचार प्रणाली पर दबाव डाल सकता है, जिससे नसों में सूजन आ सकतीहै।

12. बंद नाक

रक्त की मात्रा बढ़ने से नाक के अंदर सूजन आ जाती है और नाक हमेशा भरी हुई सी व बंद प्रतीत होती है।

13. विशेष खाने की इच्छा

गर्भवती माँओं में किसी विशेष प्रकार के खाद्य पदार्थ को खाने की इच्छा होना या किसी अन्य पदार्थ की गंध या स्वाद के प्रति अरुचि विकसित होना बहुत आम बात है।

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